पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बैठक में केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों एवं विभागों के सचिवों से शासन के तीन प्रमुख उद्देश्यों—ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, जीवनयापन में सुगमता तथा आत्मनिर्भर भारत —को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस क्या है?
- ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस से आशय उस सीमा से है, जहाँ तक विनियामक, प्रशासनिक एवं संस्थागत व्यवस्था व्यवसायों को न्यूनतम लागत, समय तथा प्रक्रियात्मक बाधाओं के साथ स्थापित करने, संचालित करने, विस्तार करने तथा बंद करने में सक्षम बनाती है।
ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस के क्षेत्र में भारत की प्रगति
- विश्व बैंक की डूइंग बिज़नेस रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग 2014 में 142वें स्थान से बढ़कर 2019 में 63वें स्थान पर पहुँच गई, जो नियामक वातावरण में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाती है।
- आईएमडी (IMD) विश्व प्रतिस्पर्धात्मकता रैंकिंग में भारत की स्थिति 2021 में 43वें स्थान से सुधरकर 2025 में 41वें स्थान पर पहुँच गई।
- विश्व बैंक के गवटेक मैच्योरिटी इंडेक्स में भारत को निरंतर समूह-A में स्थान दिया गया है, जो उन्नत डिजिटल प्रशासनिक क्षमताओं का संकेत है।
- संयुक्त राष्ट्र ई-गवर्नमेंट सर्वेक्षण ने ऑनलाइन सार्वजनिक सेवाओं, डिजिटल अवसंरचना तथा प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन के क्षेत्र में भारत की प्रगति को मान्यता प्रदान की है।
प्रमुख सरकारी पहलें
- डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP): इस कार्यक्रम के अंतर्गत भूमि अभिलेखों एवं कैडस्ट्रल मानचित्रों का डिजिटलीकरण किया गया है, जिससे भूमि विवादों में कमी आई है तथा पारदर्शिता बढ़ी है।
- यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN): इसके माध्यम से प्रत्येक भूमि खंड को विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान की गई है, जिससे भूमि प्रबंधन अधिक सटीक एवं प्रभावी हुआ है।
- श्रम सुधार: श्रम संहिताओं के माध्यम से अनेक श्रम कानूनों को समेकित कर सरल कानूनी ढाँचा तैयार किया गया है।
- एकल पंजीकरण, एकल रिटर्न तथा अखिल भारतीय लाइसेंस की व्यवस्था ने व्यवसायों की अनुपालन लागत में कमी की है।
- गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM): इस पारदर्शी डिजिटल मंच के माध्यम से MSMEs, स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों तथा स्वयं सहायता समूहों के लिए सरकारी खरीद में अवसरों का विस्तार हुआ है।
- इससे सार्वजनिक खरीद में समावेशी भागीदारी को प्रोत्साहन मिला है।
- डिजिटल वाणिज्य हेतु ओपन नेटवर्क (ONDC): इस पहल ने खुले एवं अंतर-संचालनीय डिजिटल वाणिज्य तंत्र का निर्माण किया है, जिससे छोटे व्यवसाय बड़े ई-कॉमर्स मंचों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
- पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ: PARIVESH पोर्टल के माध्यम से पर्यावरण, वन, वन्यजीव एवं तटीय विनियमन संबंधी स्वीकृतियों का डिजिटलीकरण किया गया है।
- MSME का औपचारीकरण: उद्यम पंजीकरण पोर्टल ने कागज रहित एवं स्व-घोषणा आधारित पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई है।
- जन विश्वास सुधार : इन सुधारों के अंतर्गत व्यवसाय से संबंधित सैकड़ों छोटे अपराधों का अपराधमुक्तीकरण किया गया है।
- इससे प्रक्रियागत त्रुटियों के कारण आपराधिक कार्रवाई का भय कम हुआ है तथा स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहन मिला है।
जीवनयापन में सुगमता क्या है?
- जीवनयापन में सुगमता से आशय नागरिकों की उस क्षमता से है, जिसके माध्यम से वे मूलभूत सेवाओं, अवसरों, अवसंरचना तथा शासन संबंधी सुविधाओं तक सुविधाजनक, किफायती एवं सम्मानजनक ढंग से पहुँच प्राप्त कर सकें।
- इसका उद्देश्य आवास, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छता, परिवहन, वित्तीय सेवाएँ तथा डिजिटल शासन जैसी सुविधाओं तक पहुँच सुनिश्चित कर नागरिकों के दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।
- यह समावेशी एवं सतत विकास का एक प्रमुख आधार स्तंभ है।
- भारत ने आवास, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत, वित्तीय सेवाओं, संपर्क सुविधा तथा नागरिक-केंद्रित शासन तक पहुँच बढ़ाकर जीवनयापन की सुगमता में उल्लेखनीय सुधार किया है।
प्रमुख सरकारी पहलें
- प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U): प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के माध्यम से देश में किफायती आवासों की उपलब्धता में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
- जल जीवन मिशन (JJM): “हर घर जल” के लक्ष्य के अंतर्गत पाइप जलापूर्ति का तीव्र विस्तार किया गया है।
- जून 2026 तक 15.86 करोड़ (81.94%) से अधिक परिवारों को स्वच्छ नल जल उपलब्ध कराया जा चुका है।
- JAM त्रिमूर्ति (जन धन-आधार-मोबाइल): जन धन–आधार–मोबाइल (JAM) भारत की कल्याणकारी योजनाओं के वितरण की आधारभूत व्यवस्था बन चुकी है।
- प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) ने करोड़ों वंचित नागरिकों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा।
- वित्तीय वर्ष 2024–25 में ही प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजनाओं के अंतर्गत ₹6.9 लाख करोड़ सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित किए गए।
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY): सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों को 57 करोड़ से अधिक संपार्श्विक-मुक्त ऋण स्वीकृत किए गए हैं।
- मुद्रा योजना के लगभग दो-तिहाई लाभार्थी महिलाएँ हैं।
आत्मनिर्भर भारत क्या है?
- आत्मनिर्भर भारत एक राष्ट्रीय विकास रणनीति है, जिसका उद्देश्य विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, अवसंरचना, नवाचार एवं रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की घरेलू क्षमताओं को सुदृढ़ करना है, साथ ही वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के साथ एकीकृत बने रहना है।
प्रमुख सरकारी पहलें
- मेक इन इंडिया: वर्ष 2014 में प्रारंभ की गई इस पहल का उद्देश्य निवेश को प्रोत्साहित कर, नवाचार को प्रोत्साहन देकर तथा विश्वस्तरीय अवसंरचना का विकास कर भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है।
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: इस योजना के माध्यम से प्रमुख क्षेत्रों में प्रदर्शन-आधारित वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान कर घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन दिया जा रहा है तथा भारतीय उद्योगों को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जोड़ा जा रहा है।
- स्टार्टअप इंडिया : वर्ष 2016 में प्रारंभ इस पहल का उद्देश्य नियामकीय सरलीकरण, कर प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन तथा नवाचार-आधारित उद्यमिता के माध्यम से स्टार्टअप पारितंत्र का विकास करना है।
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन: इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले विनिर्माण पारितंत्र का विकास करना है।
- इसके अंतर्गत चिप निर्माण, डिज़ाइन, पैकेजिंग तथा अनुसंधान को प्रोत्साहित कर तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ किया जा रहा है।
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: वर्ष 2023 में प्रारंभ इस मिशन का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन एवं उसके व्युत्पन्न उत्पादों के उत्पादन, उपयोग तथा निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
- साथ ही यह ऊर्जा सुरक्षा एवं कार्बन उत्सर्जन में कमी को भी प्रोत्साहन देता है।
- पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान: यह पहल विभिन्न क्षेत्रों में समेकित अवसंरचना योजना को प्रोत्साहन देती है।
- इससे परियोजनाओं में विलंब कम होता है तथा विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय में सुधार होता है।
प्रमुख चुनौतियाँ
- संस्थागत अवरोध: जटिल विनियम, अनुपालन संबंधी भार तथा स्वीकृतियों में विलंब व्यवसायों एवं सार्वजनिक सेवा वितरण को प्रभावित करते हैं।
- अंतर-विभागीय समन्वय: मंत्रालयों एवं विभागों के बीच सीमित समन्वय के कारण नीतियों में अतिव्यापन, कार्यान्वयन में विलंब तथा संसाधनों का अप्रभावी उपयोग होता है।
- क्षेत्रीय असमानताएँ: राज्यों एवं जिलों के बीच अवसंरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल संपर्क तथा आर्थिक अवसरों की उपलब्धता में अभी भी उल्लेखनीय अंतर विद्यमान है।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ: भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान, जलवायु संबंधी जोखिम तथा संरक्षणवादी नीतियाँ सतत आर्थिक विकास एवं आत्मनिर्भरता के समक्ष चुनौती प्रस्तुत करती हैं।
आगे की राह
- समग्र शासन दृष्टिकोण को सुदृढ़ करते हुए विभागीय अलगाव को समाप्त किया जाए, समेकित योजना निर्माण को प्रोत्साहन दिया जाए तथा पीएम गतिशक्ति जैसे डिजिटल मंचों का प्रभावी उपयोग कर शासन, सेवा वितरण एवं परियोजना कार्यान्वयन में सुधार किया जाए।
- ऐसे नागरिक-केंद्रित एवं विकासोन्मुख सुधारों को निरंतर आगे बढ़ाया जाए, जो एक साथ ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, जीवनयापन में सुगमता तथा आत्मनिर्भर भारत को सुदृढ़ करें और इस प्रकार विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति को गति प्रदान करें।
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